Home देश-दुनिया हमारे लिए लोकतंत्र और संविधान सर्वोपरि’, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर महामहिम द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संदेश

हमारे लिए लोकतंत्र और संविधान सर्वोपरि’, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर महामहिम द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संदेश

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नईदिल्ली(ए)। 14 अगस्त 2025 की शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 79वें स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्र को संबोधित किया. यह संबोधन एक ऐसी परंपरा है जो चिंतन और प्रेरणा दोनों को दर्शाती है. पदभार ग्रहण करने के बाद से यह राष्ट्रपति मुर्मू का चौथा स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर संबोधन है.

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में सभी देशवासियों को बधाई दी और कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है कि स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि ये दिवस हमें भारतीय होने के गौरव का विशेष स्मरण कराते हैं.

राष्ट्रपति ने कश्मीर घाटी में रेल-संपर्क की शुरुआत को एक प्रमुख उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि इससे घाटी का शेष भारत से जुड़ाव मजबूत होगा, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और नई आर्थिक संभावनाएं खुलेंगी. इसे इंजीनियरिंग की असाधारण और ऐतिहासिक उपलब्धि बताया गया.

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार मानती है कि जीवन की बुनियादी सुविधाओं पर नागरिकों का हक है. ‘जल जीवन मिशन’ के तहत ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने में लगातार प्रगति हो रही है.

उन्होंने बताया कि सरकार गरीबों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है. जो लोग गरीबी रेखा से ऊपर आ गए हैं लेकिन आर्थिक रूप से अभी भी कमजोर हैं, उन्हें भी इन योजनाओं का लाभ देकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वे फिर से गरीबी रेखा से नीचे न जाएं.

पिछले वित्त वर्ष में 6.5% जीडीपी वृद्धि दर के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग में तेजी, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और निर्यात में वृद्धि के साथ सभी प्रमुख संकेतक अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शा रहे हैं.

राष्ट्रपति ने संविधान में वर्णित न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता को लोकतंत्र के चार मजबूत स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि ये हमारी सभ्यता के मूल सिद्धांत हैं जिन्हें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पुनः जीवंत किया गया.

उन्होंने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विभाजन के दौरान हुई भयावह हिंसा और लाखों लोगों के विस्थापन को याद किया और कहा कि आज हम इतिहास की गलतियों के शिकार हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.

 

भारत: लोकतंत्र की जननी

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व के प्राचीनतम गणराज्यों की धरती है और इसे लोकतंत्र की जननी कहना उचित है. उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान और लोकतंत्र हमारे लिए सर्वोपरि हैं और इन्हीं की नींव पर हमारी लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूती से खड़ी हैं.

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