Home देश-दुनिया सदन में राहुल के व्यवहार पर भड़के अमित शाह, बोले- अपनी बहन प्रियंका गांधी से कुछ सीखें नेता प्रतिपक्ष

सदन में राहुल के व्यवहार पर भड़के अमित शाह, बोले- अपनी बहन प्रियंका गांधी से कुछ सीखें नेता प्रतिपक्ष

by admin

नईदिल्ली(ए)। गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण का विधेयक पास होने के लिए विपक्ष को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया। लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है और उन्हें मातृशक्ति के आक्रोश का सामना करना होगा। वहीं, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के असंसदीय व्यवहारों पर तीखी आपत्ति जताते हुए अमित शाह ने उन्हें अपनी बहन प्रियंका गांधी से सीखने की सलाह दी।

महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लड़ाई जारी रखेगी मोदी सरकार- शाह

साथ ही उन्होंने साफ किया कि मोदी सरकार महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लड़ाई जारी रखेगी और इसे देकर रहेगी। परिसीमन को संवैधानिक बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके नहीं होने से जनसंख्या के अनुरूप अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सीटें नहीं बढ़ पा रही हैं। इसके लिए भी विपक्ष दोषी है। अमित शाह के अनुसार जो विपक्षी दल आज महिला आरक्षण के खिलाफ खड़ी है, वहीं पिछले 30 सालों से इसे रोकने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह दल हैं जो 1996 से लगातार किसी न किसी बहाने महिलाओं के आरक्षण के रास्ते में रोड़ा अटकाती रही हैं।

2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पास

उन्होंने कांग्रेस को भी इस साजिश में शामिल बताया। 2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पास होने के बावजूद लोकसभा में नहीं आने के पीछे कांग्रेस और संप्रग में उनके सहयोगियों को जिम्मेदार ठहराया।

शाह ने कहा कि भाजपा हमेशा से महिला आरक्षण का समर्थन करती आई है। लेकिन उस समय कांग्रेस ने अपने सभी सहयोगियों को इसके विरोध में आगे कर इसे रोका था। 2027 के परिसीमन के आधार पर महिलाओं को आरक्षण देने लिए विपक्षी और खासकर कांग्रेस की ओर से दिये गए दलील को बड़ी साजिश बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा इसीलिए किया जा रहा है ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण नहीं हो सके।

उन्होंने परिसीमन में लगने वाले लंबे समय के व्यावहारिक दिक्कत का उल्लेख करते हुए कहा कि 2029 तक यह पूरा नहीं हो पाएगा और इस कारण महिला आरक्षण का मामला भी अटक जाएगा। लेकिन साथ ही उन्होंने आश्वस्त भी किया कि मोदी सरकार महिलाओं को आरक्षण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उसे देकर रहेगी।

अमित शाह ने परिसीमन पर विपक्ष की ओर से हो रही सबसे अधिक आपत्तियों का भी विस्तार से जवाब दिया। शाह ने बताया कि इससे एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूल्य के संविधान की भावना का पालन नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने बताया कि किस तरह से देश में 127 ऐसी लोकसभा सीटें हैं, जहां मतदाताओं की संख्या 20 लाख से अधिक हैं। इनमें आंध्रप्रदेश के मल्कानगिरी संसदीय क्षेत्र में 48 लाख मतदाता हैं। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं तक सांसद का पहुंचना और मतदाताओं का सांसद तक पहुंचना बहुत कठिन है।

संविधान में समय-समय पर परिसीमन की व्यवस्था की है

इसीलिए संविधान में समय-समय पर परिसीमन की व्यवस्था की है, जो आपातकाल के दौरान 2026 में फ्रीज किये जाने के बाद नहीं बढ़ी है। जबकि देश की जनसंख्या 1976 की 56.89 करोड़ की तुलना में 140 करोड़ हो गई है। जनसंख्या के अनुपात में एससी और एसटी के लिए सीटों का आरक्षण भी जुड़ा है।

एससी, एसटी की जनसंख्या बढ़ने के बावजूद उनकी सीटें नहीं बढ़ पा रही हैं। उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि परिसीमन का विरोध करते हुए असल में एससी एसटी का भी कर रहे हैं। अमित शाह ने सीटों की संख्या बढ़ाए बिना ही महिला आरक्षण देने की विपक्ष की मांग को भी अव्यवहारिक बताया।

शाह के अनुसार बिना सीटें बढ़ाए आरक्षण देने से तमिलनाडु की 39 में से 13 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएगी। वहीं 50 फीसद सीटें बढ़ाने की स्थिति में 59 सीटों में 20 सीट आरक्षित होने के बावजूद 20 सीटें खुली रहेंगी।

उन्होंने एक बार फिर 50 फीसद सीटें बढ़ाने से लोकसभा में दक्षिण के राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ने के आंकड़े सदन में रखे। उन्होंने विपक्ष पर उत्तर और दक्षिण के राज्यों का विवाद खड़ा कर देश को बांटने की साजिश का आरोप लगाया।

शाह ने साफ किया कि मोदी सरकार ऐसा नहीं होने देगी। ये संसद लक्षदीप से आने वाले एक मात्र सांसद का भी उतना ही है, जितना उत्तर प्रदेश और बिहार के सांसदों का है। उन्होंने कहा कि सांसद किसी धर्म, जाति या क्षेत्र का शपथ नहीं लेता है।

उन्होंने कहा कि कोई भी देश के भीतर विभाजन करके सत्ता प्राप्त नहीं कर सकता। विपक्ष की ओर संविधान संशोधन विधेयक लाने के पीछे जाति जनगणना रोकने के आरोप को भी अमित शाह ने सिरे से खारिज कर दिया।

शाह ने कहा कि जनगणना का काम शुरू हो चुका है और आजादी के बाद पहली बार जातियों की भी जनगणना की जाएगी। उन्होंने कांग्रेस के ओबीसी विरोधी होने के इतिहास बताते हुए कहा कि जाति जनगणना के आंकड़े आने के बाद संसद के मत अनुरूप मोदी सरकार ओबीसी का निर्धारित करने के लिए तैयार है।

प्रियंका से सीखें राहुल

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के असंसदीय व्यवहारों पर तीखी आपत्ति जताते हुए अमित शाह ने उन्हें अपनी बहन प्रियंका गांधी से सीखने की सलाह दी। शाह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के भाषण में सरेंडर, डरते हो, जैसे शब्दों की भरमार होती है, जो संसदीय गरिमा के अनुरूप नहीं है।

इसके साथ ही सदन के रास्ते में पकोड़े खाने, आंख मारने, फ्लाइंग किस जैसे मु्ददों का भी उल्लेख किया। अमित शाह ने राहुल गांधी द्वारा तीनों बिलों को क्रूर बताने पर भी आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के पवित्र यज्ञ में हड्डियां डालने के लिए देश कभी उन्हें माफ नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि राहुल को अपनी ही पार्टी के वरिष्टों से सीखना चाहिए। अगर वह उनसे नहीं सीखना चाहते हैं तो प्रियंका गांधी से ही सीखें। तब प्रियंका अपनी सीट पर बैठी थीं।

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