रायपुर। स्वच्छ ऊर्जा को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में राजनांदगांव जिले में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देश पर गुरुवार को जिलेभर में एक ही दिन में 100 से अधिक प्रधानमंत्री सूर्य घर सभाओं का आयोजन किया गया। ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में आयोजित इन सभाओं के माध्यम से नागरिकों को सोलर रूफटॉप प्रणाली, सरकारी सब्सिडी, आवेदन प्रक्रिया और बिजली बिल में होने वाली बचत की विस्तृत जानकारी दी गई।
जिले में अब तक 4 हजार से अधिक हितग्राहियों के घरों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इससे न केवल उनके बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है, बल्कि अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर कई परिवार आर्थिक लाभ भी अर्जित कर रहे हैं। इस पहल ने आम उपभोक्ताओं को ऊर्जा उत्पादक बनने का अवसर दिया है।
सभाओं में विद्युत विभाग, विभिन्न बैंकों और अधिकृत वेंडर्स के प्रतिनिधियों ने योजना की पात्रता, ऑनलाइन आवेदन, सब्सिडी, ऋण सुविधा तथा तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। साथ ही उपस्थित नागरिकों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए अधिक से अधिक पात्र परिवारों से योजना का लाभ उठाने का आग्रह किया गया।
जिला प्रशासन का मानना है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना केवल बिजली बिल कम करने की पहल नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण अभियान है। यही कारण है कि जिले में विशेष जनजागरूकता अभियान लगातार जारी है, ताकि अधिकाधिक परिवार इस महत्वाकांक्षी योजना से जुड़कर आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों स्तरों पर लाभान्वित हो सकें।
- अब सोलर से बचत भी और कमाई भी
कभी हर महीने बिजली का बिल चुकाने वाले राजनांदगांव जिले के किसान रामेश्वर प्रसाद चंद्राकर आज अपने घर की छत पर लगे सोलर संयंत्र से न केवल बिजली की जरूरत पूरी कर रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर आय अर्जित करने की तैयारी में भी हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने ग्राम जंगलेसर निवासी इस किसान की जिंदगी में ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय जोड़ दिया है।
रामेश्वर ने फरवरी 2026 में बैंक की वित्तीय सहायता से अपने घर पर 2 किलोवॉट क्षमता का रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया। इस पर उन्हें शासन की ओर से 90 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल 1,000 से 1,500 रुपये तक आता था, लेकिन अब उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो चुका है।
रामेश्वर बताते हैं कि उनका संयंत्र प्रतिदिन औसतन 5 से 8 यूनिट अतिरिक्त बिजली पैदा करता है, जबकि गर्मी के मौसम में यह उत्पादन 12 से 14 यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच जाता है। घर की आवश्यकता पूरी होने के बाद बची हुई बिजली ग्रिड में चली जाती है, जिसका भुगतान वार्षिक समायोजन के बाद उनके बैंक खाते में किया जाएगा। मोबाइल एप के माध्यम से वे रोजाना बिजली उत्पादन और खपत की निगरानी भी करते हैं। पहले मैं बिजली का उपभोक्ता था, अब बिजली का उत्पादक बन गया हूं। इस योजना ने मेरे बिजली खर्च को समाप्त कर दिया और अतिरिक्त आय का रास्ता भी खोल दिया है।
उनकी सफलता का असर पूरे गांव में दिखाई दे रहा है। उनके अनुभव से प्रेरित होकर ग्राम जंगलेसर के लगभग 40 से 50 परिवार भी रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर चुके हैं। रामेश्वर स्वयं ग्रामीणों को मोबाइल एप पर बिजली उत्पादन की जानकारी दिखाकर योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना केवल बिजली बचाने की पहल नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम भी है।