
भिलाई। न्यू आजाद गणेशोत्सव समिति, सेक्टर-2 भिलाई द्वारा प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी भगवान श्री गणेश की भव्य प्रतिमा की स्थापना कर गणेशोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। समिति इस वर्ष गणेशोत्सव का 42वां वर्ष मना रही है। आयोजन को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह का माहौल है।

गणेशोत्सव के अवसर पर समिति द्वारा इस वर्ष तारापीठ स्थित मनोकामना मंदिर की थीम पर आकर्षक एवं भव्य पंडाल और झांकी तैयार की गई है। झांकी को धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है।
- पेड़-पौधों और हरियाली संरक्षण का संदेश
सेक्टर-2 में पत्रकारों से चर्चा करते हुए न्यू आजाद गणेशोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद जे. श्रीनिवास राव ने बताया कि इस वर्ष की झांकी का मुख्य उद्देश्य पेड़-पौधों और हरियाली के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए झांकी के माध्यम से लोगों को प्रकृति की रक्षा और अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने का संदेश दिया जा रहा है।
- पक्षियों के संरक्षण पर भी जोर
समिति अध्यक्ष ने बताया कि झांकी में प्रकृति के साथ-साथ पक्षियों के संरक्षण का संदेश भी प्रमुखता से दिया गया है। बदलते पर्यावरण और घटते हरित क्षेत्र का प्रभाव पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं पर भी पड़ रहा है। ऐसे में लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास समिति द्वारा किया जा रहा है।
- धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक संदेश
जे. श्रीनिवास राव ने कहा कि समिति का प्रयास है कि गणेश उत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि इसके माध्यम से समाज के महत्वपूर्ण विषयों पर भी जनजागरूकता पैदा हो। गणेशोत्सव जैसे व्यापक जनभागीदारी वाले आयोजन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, पेड़-पौधों की सुरक्षा और पक्षियों के संरक्षण का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्री गणेश की आराधना के साथ प्रकृति के संरक्षण का संकल्प भी लिया जाना चाहिए। समिति की झांकी इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।
- आकर्षण का केंद्र बना भव्य पंडाल
तारापीठ के मनोकामना मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया भव्य पंडाल और झांकी गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। धार्मिक सज्जा के साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय संदेशों को शामिल किए जाने से आयोजन को एक विशेष स्वरूप मिला है। समिति द्वारा श्रद्धालुओं से गणेशोत्सव में शामिल होने के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की गई है।