Home छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्व. बलिराम कश्यप और स्व. सुरुज बाई खांडे की पुण्यतिथि पर किया उनके योगदान को स्मरण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्व. बलिराम कश्यप और स्व. सुरुज बाई खांडे की पुण्यतिथि पर किया उनके योगदान को स्मरण

by admin

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व सांसद स्वर्गीय बलिराम कश्यप की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. बलिराम कश्यप जी का जीवन जनसेवा, समर्पण और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए सतत संघर्ष का प्रेरणादायी उदाहरण रहा है। उन्होंने बस्तर अंचल के सर्वांगीण विकास, क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और जनजातीय समाज के अधिकारों एवं सम्मान के लिए सदैव सक्रिय भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. कश्यप जी सरलता, ईमानदारी और जनहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए सदैव याद किए जाएंगे। उन्होंने जनप्रतिनिधि के रूप में जनता के विश्वास को सर्वोपरि रखते हुए बस्तर क्षेत्र की आवाज़ को मजबूती से उठाया और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. बलिराम कश्यप का व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका समर्पित जीवन बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्व. सुरुज बाई खांडे की पुण्यतिथि पर किया स्मरण
  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की प्रख्यात भरथरी गायिका स्वर्गीय सुरुज बाई खांडे की पुण्यतिथि 10 मार्च 2026 पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्व. सुरुज बाई खांडे छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और लोकगायन परंपरा की एक विशिष्ट पहचान थीं। उन्होंने अपने अद्भुत कला कौशल और मधुर स्वर से भरथरी गायन परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया तथा छत्तीसगढ़ की लोकधारा को देश और दुनिया तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. सुरुज बाई खांडे ने लोक परंपराओं को सहेजने, उन्हें जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जो कार्य किया, वह अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है। उनका योगदान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध बनाने में मील का पत्थर है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. सुरुज बाई खांडे की कला, उनकी साधना और लोकसंस्कृति के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। प्रदेशवासी उनके अमूल्य योगदान को सदैव आदर और सम्मान के साथ स्मरण करते रहेंगे।

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