विशेष लेख : (भूपेन्द्र सिंह)
रायपुर। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का असर अब प्रदेश के कारोबारी माहौल में दिखाई देने लगा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में लागू किए गए प्रावधानों ने छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने का काम किया है। इसका सबसे बड़ा लाभ उन लाखों एमएसएमई इकाइयों को मिलने की उम्मीद है, जो रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
किसी भी प्रदेश में उद्योग तभी तेजी से आगे बढ़ते हैं, जब कारोबारियों को अनावश्यक सरकारी प्रक्रियाओं और बार-बार की औपचारिकताओं से राहत मिले। लंबे समय तक उद्योगों को विभिन्न लाइसेंस, अनुमतियों, निरीक्षणों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं के कारण अपना काफी समय और संसाधन खर्च करना पड़ता था। छोटे उद्यमियों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण होती थी, क्योंकि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्हें बड़ी कंपनियों जैसी ही प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस समस्या को समझते हुए कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े प्रावधानों का उद्देश्य यही है कि जो उद्योग निर्धारित नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं, उन्हें हर कदम पर अनावश्यक अनुमति और निरीक्षण की प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
कम जोखिम वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए स्वप्रमाणन जैसी व्यवस्था कारोबारियों में विश्वास बढ़ाने वाली पहल है। वहीं मध्यम जोखिम वाली इकाइयों के लिए थर्ड पार्टी प्रमाणन की सुविधा से सरकारी तंत्र पर अनावश्यक दबाव कम होगा और उद्योगों के लिए प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनेगी। उच्च जोखिम वाले उद्योगों में आवश्यक निरीक्षण की व्यवस्था जारी रहना यह सुनिश्चित करता है कि सरलीकरण के साथ सुरक्षा और नियामकीय अनुशासन से समझौता न हो।
इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू समयबद्धता भी है। निर्धारित समय सीमा में प्रमाणपत्र या स्वीकृति जारी करने की व्यवस्था से उद्यमियों को अपने प्रोजेक्ट की योजना बनाने में सुविधा मिलेगी। यदि किसी आवेदन पर तय समय में निर्णय नहीं होता है तो जवाबदेही तय करने की व्यवस्था प्रशासनिक कार्यप्रणाली में तेजी लाने का काम करेगी। इससे यह संदेश जाता है कि उद्योगों के लिए समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पूंजी और संसाधन।
छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं। ये उद्योग केवल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देते हैं। इसलिए इन इकाइयों के लिए प्रक्रियाओं का सरल होना पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम है।
राज्य में नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निवेश आकर्षित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। बड़े निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए केवल आर्थिक प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं होता। निवेशकों को ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था भी चाहिए जिसमें निर्णय समय पर हों, प्रक्रियाएं स्पष्ट हों और अनावश्यक हस्तक्षेप कम से कम हो। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है।
दरअसल, सरकार और उद्योग के बीच संबंध का आधार नियंत्रण नहीं बल्कि विश्वास होना चाहिए। नियमों का पालन करने वाले उद्यमियों को सुविधा मिले और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई हो—यही संतुलित व्यवस्था किसी भी सफल औद्योगिक राज्य की पहचान होती है।
इसी सोच के अनुरूप जनविश्वास जैसे सुधारों के माध्यम से मामूली तकनीकी या प्रक्रियागत त्रुटियों के लिए अत्यधिक दंडात्मक प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य कारोबारियों को डर के माहौल से निकालकर जिम्मेदारी और अनुपालन की संस्कृति की ओर ले जाना है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का वास्तविक लाभ आने वाले समय में तब और स्पष्ट होगा, जब नए उद्यम स्थापित होंगे, पुराने उद्योगों का विस्तार होगा और निवेश जमीन पर उतरेंगे। सरल नियम, समयबद्ध सेवाएं, पारदर्शी व्यवस्था और सरकार का सहयोग—ये चारों मिलकर छत्तीसगढ़ को उद्योगों के लिए अधिक आकर्षक गंतव्य बना सकते हैं।
छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों और औद्योगिक संभावनाओं से समृद्ध राज्य है। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन संभावनाओं को अनुकूल कारोबारी वातावरण के साथ जोड़ा जाए। राज्य सरकार द्वारा प्रक्रियाओं के सरलीकरण और निवेश को प्रोत्साहन देने की दिशा में उठाए जा रहे कदम इसी बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं।
यदि शासन और उद्योग के बीच विश्वास की यह प्रक्रिया लगातार मजबूत होती रही, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ न केवल निवेश का केंद्र बनेगा, बल्कि एमएसएमई और स्थानीय उद्यमिता के लिए भी देश के अग्रणी राज्यों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है।