नईदिल्ली(ए)। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी की ग्रेच्युटी से किसी भी तरह की वसूली करना गैरकानूनी है, खासकर तब जब इसी वसूली को लेकर पहले ही अदालतें राज्य सरकार की कार्रवाई को खारिज कर चुकी हों। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कमलेश टुटेजा नामक अपीलकर्ता की याचिका स्वीकार करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को देर से दाखिल करने और लापरवाही बताते हुए खारिज कर दिया था। कमलेश टुटेजा पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम लिमिटेड में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे, 30 अप्रैल 2010 को रिटायर हुए। उन्हें सेवानिवृत्ति पर 6.50 लाख रुपये की ग्रेच्युटी दी गई, लेकिन इसमें से 75,720 रुपये काट लिए गए। इसके अलावा राज्य सरकार ने 5.74 लाख रुपये (ब्याज सहित) की वसूली के लिए चंडीगढ़ की सिविल कोर्ट में केस दायर किया। हालांकि यह केस 2015 में खारिज हो गया। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ पहली और दूसरी अपील की, लेकिन दोनों ही अपील खारिज हो गईं। ग्रेच्युटी की सीमा और विवाद का कारण
दरअसल, अगस्त 2009 में सरकार ने ग्रेच्युटी की सीमा 3.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी थी। विवाद इस बात पर हुआ कि यह नया आदेश कब से लागू होगा। टुटेजा का कहना था कि नियम अगस्त 2009 से लागू हुआ है, जबकि राज्य सरकार का दावा था कि यह मई 2010 से लागू होगा। इस विवाद के चलते राज्य सरकार ने वसूली का प्रयास किया। लेकिन अदालतों ने साफ कर दिया कि सरकार कर्मचारी की ग्रेच्युटी से किसी भी तरह की राशि वापस नहीं ले सकती।
सेवानिवृत्त कर्मी की ग्रेच्युटी से राशि वसूली जायज नहीं : सुप्रीम कोर्ट, अदालत ने अपीलकर्ता को दी बड़ी राहत
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