
नईदिल्ली(ए)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि किसी उम्मीदवार ने अपनी संपत्ति के बारे में कुछ जानकारी का खुलासा नहीं किया है, अदालतों को अत्यधिक पांडित्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाकर चुनाव को अमान्य करने की जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए। खासकर तब जब कि इससे चुनाव के नतीजे प्रभावित न हों। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा, कि यह पता लगाना होगा कि क्या इस तरह का छिपाव या खुलासा न करना इतना बड़ा और व्यापक था कि इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकता था। पीठ ने कहा, हमारी राय में, असली परीक्षा यह होगी कि क्या किसी भी मामले में संपत्ति के बारे में जानकारी का खुलासा न करना परिणाम का प्रभावित करने वाला या अप्रासंगिक है, जिसका निष्कर्ष चुनाव को वैध या अमान्य घोषित करने का आधार होगा। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि जहां तक संपत्ति और शैक्षिक योग्यता का संबंध है, इसकी घोषणा की आवश्यकता को अनुचित रूप से बढ़ा-चढ़ाकर किसी वैध घोषित चुनाव को, मामूली तकनीकी आधार पर अमान्य नहीं किया जाना चाहिए। यह जनादेश को रद्द करने का आधार नहीं होना चाहिए।