
नई दिल्ली(ए)। जमानत याचिकाओं की सुनवाई में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि व्यक्तिगत आजादी से जुड़े मामलों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन कई हाईकोर्ट में जमानत याचिकाएं समय पर सूचीबद्ध नहीं हो रहीं। इसी चिंता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट से लंबित जमानत मामलों का पूरा ब्योरा मांगा है। अदालत ने साफ कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वे इस साल 1 जनवरी के बाद दायर सभी जमानत याचिकाओं की जानकारी दें। इसमें नियमित और अग्रिम जमानत, दोनों तरह की अर्जी शामिल होंगी। कोर्ट ने कहा कि हर केस की फाइलिंग तारीख, अगली सुनवाई की तारीख और फैसला हुआ या नहीं, इसकी जानकारी दी जाए। साथ ही जनवरी 2025 से पहले दाखिल होकर अभी तक लंबित जमानत याचिकाओं का भी पूरा डेटा देने को कहा गया है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि भारी पेंडेंसी अपनी जगह है, लेकिन जमानत जैसे मामलों को टाला नहीं जा सकता। बेंच ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि कुछ हाईकोर्ट में जमानत मामलों की अर्जेंट लिस्टिंग नहीं हो रही, जिससे लोग जेल में पड़े रहते हैं और उन्हें यह भी नहीं पता होता कि उनकी अर्जी कब सुनी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि रोस्टर तय करना मुख्य न्यायाधीश का अधिकार है, लेकिन जरूरत हो तो जमानत मामलों के लिए बेंच बढ़ाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह जरूरी दिशानिर्देश जारी करने के लिए बाध्य है। यह मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित एक जमानत केस में बार-बार स्थगन को लेकर दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने राज्य एजेंसियों को भी निर्देश दिया कि वे जमानत मामलों के त्वरित निपटारे में सहयोग करें।