नईदिल्ली(ए)। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले महीने अप्रैल में इलेक्टि्रक कार की बिक्री में पिछले साल अप्रैल के मुकाबले 75 प्रतिशत तो इलेक्टि्रक दोपहिया वाहनों की बिक्री में 60.73 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जानकारों का कहना है कि कार खरीदारी के दौरान बैट्री को किराए पर देने की नई प्रणाली को अपनाने से कार व दोपहिया दोनों की बिक्री में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ने से भी इसे प्रोत्साहन मिल रहा है।
बढ़ा इलेक्ट्रिक कारों का चलन
इलेक्ट्रिक कार की बिक्री में बैट्री एज ए सर्विस (बास) प्रणाली के जोर पकड़ने से और इजाफा की संभावना जताई जा रही है। टाटा मोटर्स से लेकर मारुति सुजुकी व कई अन्य कंपनियां इलेक्टि्रक कार की बैट्री सर्विस के रूप में मुहैया करा रही हैं।
इस प्रणाली के तहत कार की खरीदारी के दौरान बैट्री का शुल्क नहीं देना पड़ता है जिससे इलेक्टि्रक कार की कीमत कम हो जाती है। बैट्री इस्तेमाल के बदले कंपनियां उसका किराया लेती है। इस किराए की दर सभी कंपनियों की अलग-अलग है। किसी का तीन रुपए प्रति किलोमीटर तो किसी का 3.5 रुपए किलोमीटर तो किसी का छह रुपए प्रति किलोमीटर भी है।
एक बार में एक निश्चित सीमा से कम का किराया नहीं लिया जाएगा। जैसे एमजी विंडसर के लिए एक बार में कम से कम 1500 किलोमीटर का किराया देना होता है। कार कंपनियों का कहना है कि बैट्री की कीमत कार की कुल कीमत में 35-40 प्रतिशत होती है।
अगर बैट्री एज ए सर्विस (बास) सिस्टम चल पड़ी तो निश्चित रूप से कार की बिक्री में और तेजी आएगी। टाटा शो-रूम के प्रबंधकों ने बताया कि इस प्रणाली के आरंभ होने के बाद इलेक्टि्रक कार की बिक्री बढ़ रही है। कई दोपहिया कंपनी बैट्री स्वैपिंग या बैट्री को किराए पर पहले से दे रही है।
बढ़ी बिक्री
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के आंकड़ों के मुताबिक इस साल अप्रैल में कार की कुल बिक्री में इलेक्टि्रक कार की हिस्सेदारी छह प्रतिशत हो गई जो पिछले साल 3.7 प्रतिशत थी। इस साल मार्च में यह हिस्सेदारी 5.1 प्रतिशत थी।
वैसे ही बाजार में दोपहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्टि्रक की हिस्सेदारी इस साल मार्च में 9.8 प्रतिशत तक पहुंच गई जो पिछले साल अप्रैल में 5.5 प्रतिशत थी। भारी उद्योग मंत्रालय के मुताबिक माल ढोने वाले तिपहिया वाहनों में इलेक्टि्रक तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत हो गई है जो एक साल पहले 23 प्रतिशत थी।