
मुंबई(ए)। आरबीआई ने सोमवार को वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री पर रोक लगाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। इनमें धोखाधड़ीपूर्ण बिक्री टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध और ग्राहक की सहमति तथा बिक्री के संबंध में मानकों को कड़ा किया गया है। केंद्रीय बैंक ने डिजिटल इंटरफेस में ‘डार्क पैटर्न’ के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया है, जो ग्राहकों को भ्रमित करते हैं।
आरबीआई ने कहा कि बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान और उनके एजेंट अब वेबसाइटों, मोबाइल एप व अन्य बिक्री चैनलों पर डार्क पैटर्न का उपयोग नहीं कर सकेंगे। यह निर्देश फरवरी में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा में गवर्नर की घोषणाओं के बाद आए हैं। नए नियमों के अनुसार, बैंकों व वित्तीय संस्थानों को अपने इंटरफेस का समय-समय पर आडिट कराना होगा ताकि वे अनुचित विशेषताओं की पहचान कर सकें और उन्हें हटा सकें। यह नियम आरबीआई जिम्मेदार व्यापार आचरण दिशानिर्देशों में संशोधनों का हिस्सा हैं और एक जनवरी, 2027 से लागू होंगे।

केंद्रीय बैंक ने गलत बिक्री की एक व्यापक परिभाषा भी प्रस्तुत की है, जिसमें ग्राहकों के लिए अनुपयुक्त उत्पादों की पेशकश, भ्रामक जानकारी प्रदान करना, ग्राहक से स्पष्ट सहमति प्राप्त किए बिना उत्पाद बेचना और अनिवार्य रूप से उत्पादों को एक साथ बेचना शामिल है। यदि किसी वित्तीय उत्पाद या सेवा की गलत बिक्री स्थापित होती है, तो बैंक को पूरी राशि वापस करनी होगी और ग्राहक को बिक्री रद करने की सूचना देनी होगी।