
नईदिल्ली(ए)। मिडिल ईस्ट में भड़की जंग और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर बढ़ते तनाव ने भारत में रसोई गैस (LPG) की सप्लाई चेन को बुरी तरह हिला कर रख दिया है। लेकिन इस वैश्विक संकट के बीच करोड़ों भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद, भारत ने गैस आपूर्ति के लिए एक नया और मजबूत साथी ढूंढ निकाला है। अमेरिका और यूएई के बाद अब अफ्रीकी देश अल्जीरिया भारत को एलपीजी सप्लाई करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है, जिसने मुश्किल वक्त में भारत की ऊर्जा जरूरतों को एक बड़ी संजीवनी दी है।

इंडियन ऑयल की शानदार डील, अब सस्ते में मिलेगी गैस
अल्जीरिया की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी ‘सोनाट्रैक’ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी एलपीजी निर्यातक है। वैश्विक हालात को देखते हुए भारत की दिग्गज सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने सोनाट्रैक के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इस अहम डील के तहत साल 2027 में अल्जीरिया हर महीने भारत को 55,000 टन रसोई गैस भेजेगा। सबसे राहत की बात यह है कि अल्जीरिया से मिलने वाली यह गैस सऊदी अरामको द्वारा तय की गई कीमतों के मुकाबले काफी सस्ती होगी। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में अल्जीरिया ने भारत को 1.10 लाख टन से अधिक एलपीजी भेजी है, जो देश के कुल आयात का करीब 10 प्रतिशत है।
अमेरिका बना सबसे बड़ा सप्लायर, मिडिल ईस्ट का वर्चस्व टूटा
दशकों तक भारत अपनी रसोई गैस की 90 प्रतिशत जरूरतों के लिए पूरी तरह से पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) पर निर्भर रहा है। लेकिन वहां चल रहे भीषण युद्ध ने हालात बदल दिए हैं। पश्चिमी एशिया से सप्लाई रुकने और आयात आधा रह जाने के कारण भारत सरकार को घरेलू एलपीजी की खरीद पर लिमिट तय करने और नए कनेक्शन पर रोक लगाने जैसे सख्त कदम उठाने पड़े थे। इसी संकट से उबरने के लिए भारत ने अपनी रणनीति बदली और अमेरिका का रुख किया। अब अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी सप्लायर बन चुका है। अकेले अगस्त में अमेरिका ने 6.22 लाख टन गैस भारत भेजी है, जो कुल विदेशी आयात का बंपर 57.7 प्रतिशत हिस्सा है। इसके बाद दूसरे नंबर पर यूएई काबिज है।
34 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए गेमचेंजर साबित होगा यह कदम
भारत दुनिया में घरेलू इस्तेमाल वाली रसोई गैस का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। देश में करीब 34 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनकी मांग पूरी करने के लिए हर साल 3.3 करोड़ टन गैस की जरूरत पड़ती है। इसमें से 65 फीसदी हिस्सा भारत विदेशों से खरीदता है, जिस पर सालाना 11 अरब डॉलर का भारी-भरकम खर्च आता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मिडिल ईस्ट पर निर्भर रहने के बजाय अमेरिका और अल्जीरिया जैसे नए विकल्प तैयार करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मास्टरस्ट्रोक है। वर्तमान में भारत और अल्जीरिया के बीच 1.71 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जो इस नई गैस डील के बाद अब एक नए मुकाम पर पहुंचने वाला है।