Home छत्तीसगढ़ सारंगढ़-बिलाईगढ़: दो माह में कायाकल्प, दो माह में बदली सरकारी अस्पतालों की सूरत, स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक सुधार

सारंगढ़-बिलाईगढ़: दो माह में कायाकल्प, दो माह में बदली सरकारी अस्पतालों की सूरत, स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक सुधार

by admin

रायपुर। दृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी अमले की एकजुटता क्या रंग ला सकती है, इसकी मिसाल आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले ने पेश की है। जो जिला अप्रैल महीने तक स्वास्थ्य सेवाओं के राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) में राज्य के सबसे निचले पायदानों पर संघर्ष कर रहा था, उसने महज दो महीने के भीतर सफलता की एक ऐसी नई इबारत लिखी है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिला प्रशासन की चौकस कमान और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी नेतृत्व के दम पर जिले ने अपने नेशनल क्वालिटी स्कोर में 39.4 प्रतिशत का एक अप्रत्याशित सुधार दर्ज किया है। ​यह कहानी सिर्फ आंकड़ों के बदलने की नहीं है, बल्कि सरकारी अस्पतालों के प्रति आम जनता के भरोसे को मजबूत करने की है।

​*27 से 37.65 प्रतिशत का सफर- सिर्फ दो महीनों की कड़े परिश्रम का नतीजा*

​बीते अप्रैल 2026 तक सारंगढ़-बिलाईगढ़ का NQAS स्कोर महज 27 प्रतिशत था, जिसे किसी भी विकासशील जिले के लिए चिंताजनक माना जा सकता है। लेकिन इस चुनौती को कलेक्टर ने एक मिशन के रूप में लिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के साथ मिलकर स्वास्थ्य ढांचे की कमियों (गैप एनालिसिस) को बारीकी से परखा गया। ​नतीजा यह हुआ कि जून आते-आते यह स्कोर 10.65 प्रतिशत अंकों की छलांग लगाकर 37.65 प्रतिशत पर पहुंच गया। इस कायापलट को राज्य के स्वास्थ्य महकमे में एक बड़ी और अनुकरणीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

​*जमीन पर क्या बदला, जिसने पलट दी तस्वीर*

​अस्पतालों की इस सूरत को बदलने के लिए विभाग ने सिर्फ कागजी कागजी घोड़े नहीं दौड़ाए, बल्कि श्क्वालिटी कल्चरश् (गुणवत्ता की संस्कृति) को हर कर्मचारी के रूटीन में शामिल किया। अस्पतालों में साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया।बायोमेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन को कड़ाई से लागू किया गया ताकि अस्पताल बीमारियों को बांटने के बजाय उन्हें ठीक करने का सुरक्षित जरिया बनें। ​मरीज हितैषी सुविधाएं जैसे ओपीडी से लेकर वार्डों तक के बुनियादी ढांचे को इस तरह सुधारा गया कि अस्पताल आने वाले मरीजों को वहां का माहौल सुकून देने वाला लगे। इसके साथ ही डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और ग्रामीण क्षेत्रों के मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को लगातार तकनीकी प्रशिक्षण देकर उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाया गया।

​इस अभियान को गति देने के लिए जिले के तीनों विकासखंडों के खंड चिकित्सा अधिकारियों (BMO) ने कमान संभाली। बिलाईगढ़ , सारंगढ़ के और बरमकेला के डॉक्टर ने मिलकर हर छोटी-बड़ी स्वास्थ्य संस्था के लिए एक कस्टमाइज्ड कार्ययोजना तैयार की। नियमित मैदानी दौरों, लगातार मॉनिटरिंग और मैराथन समीक्षा बैठकों ने यह सुनिश्चित किया कि कहीं भी काम में ढिलाई न हो।

​*गौरव का क्षण- 14 स्वास्थ्य केंद्रों को मिला राष्ट्रीय प्रमाण पत्र*

​इस सामूहिक प्रयास का सबसे खूबसूरत परिणाम यह रहा कि जिले के दूरदराज के इलाकों में स्थित 14 स्वास्थ्य केंद्रों ने कड़े राष्ट्रीय मानकों को पास करते हुए NQAS क्वालिफाइड होने का तमगा हासिल कर लिया है। ​सारंगढ़ विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोपालपुर, कनकबीरा, गोड़म और भेड़वन के साथ-साथ उप स्वास्थ्य केंद्र बेलाडुला, पचरी और सालर ने इस राष्ट्रीय मानक सूची में अपनी जगह बनाई।​ बरमकेला विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेंधरा और उप स्वास्थ्य केंद्र पिहरा, साल्हेओना, नंदीगांव, लुकापारा, सोनबाला व रिसोरा ने भी कड़े पैमानों को पार कर यह गौरव हासिल किया।

​      सारंगढ़-बिलाईगढ़ की यह छलांग इस बात का जीवंत प्रमाण है कि संसाधन चाहे जितने भी सीमित हों, अगर नेतृत्व में विजन हो और टीम में समर्पण, तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी तस्वीर को बहुत कम समय में बदला जा सकता है। यह मॉडल अब राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।

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