Home देश-दुनिया देख रहें हो… नेपाल और बांग्लादेश का क्या हाल है…,सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमें अपने संविधान पर है गर्व

देख रहें हो… नेपाल और बांग्लादेश का क्या हाल है…,सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमें अपने संविधान पर है गर्व

by admin

नईदिल्ली(ए)। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान संविधान की ताकत और इसकी अहमियत को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि हमें अपने संविधान पर गर्व करना चाहिए, क्योंकि यह जनता के अधिकारों की रक्षा करता है और लोकतंत्र को मजबूती देता है।

सुनवाई के दौरान नेपाल में इस हफ्ते और बांग्लादेश में पिछले साल जुलाई में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया गया। चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा कि हमारे संविधान में राष्ट्रपति को किसी भी कानून से जुड़े सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह लेने का अधिकार दिया गया है, जो इसे और मजबूत बनाता है।

नेपाल में इस सप्ताह हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों (और पिछले वर्ष जुलाई में बांग्लादेश में) का जिक्र बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में हुआ, जहां सुप्रीम कोर्ट में 12 अप्रैल के आदेश पर राष्ट्रपति के संदर्भ में सुनवाई हुई. कोर्ट ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपालों के लिए राज्यों के विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समय सीमा निर्धारित की थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्यपालों की ओर से विधेयक रोके जाने की जानकारी दी तो वहीं कपिल सिब्बल ने कहा कि 2014 के बाद ऐसे मामले बढ़ गए हैं और उससे पहले ऐसा होता ही नहीं था। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं तो आपकी सरकार की भी तारीफ कर रहा हूं। 1970 के बाद से अब तक डेटा मैंने पेश किया है। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि आपको तारीफ करनी ही चाहिए क्योंकि 2014 से पहले ऐसा हुआ भी नहीं था। इस पर मेहता ने कहा कि मैंने तो सटीक डेटा दिया है कि कैसे संविधान काम करता है। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी कहा कि हम पहले ही कह चुके हैं कि राज्यपाल केंद्र सरकार का एजेंट नहीं होता है। वह एक न्यूट्रल संवैधानिक पदाधिकारी होता है, जो निष्पक्ष होकर ही काम करता है। वह संविधान के अनुसार ही काम करता है और उसके अनुसार फैसले लेने में राज्य सरकार को मदद करता है। वह राज्य सरकार और केंद्र के बीच किसी भी तरह के मतभेद में अहम भूमिका अदा करता है।

उन्होंने कहा कि इस बात का तो कोई सवाल ही नहीं है कि गवर्नर केंद्र सरकार के डाकिया के तौर पर काम करता है। राज्यपालों से यह अपेक्षा नहीं की जाती है कि वे राज्य सरकार की नीतियों को लागू करें या फिर पॉपुलर मैंडेट के अनुसार काम करें। संविधान में राज्यपाल का रोल स्पष्ट तौर पर बताया गया है और वह राजनीतिक तौर पर भी अपनी बात रखते सकते हैं।

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