Home देश-दुनिया ओला-उबर जैसी एप वाली टैक्सियों का किराया महंगा, MMRTA ने दिए आदेश, ऐसे मिलेगी किराए की जानकारी

ओला-उबर जैसी एप वाली टैक्सियों का किराया महंगा, MMRTA ने दिए आदेश, ऐसे मिलेगी किराए की जानकारी

by admin

नईदिल्ली(ए)। महाराष्ट्र में ओला, उबर और रैपिडो जैसी एप-आधारित टैक्सियों ने सरकार द्वारा अधिसूचित नया किराया लागू कर दिया है। अब यात्रियों को हैचबैक के लिए 28, सेडान के लिए 31 और एसयूवी के लिए 34 रुपये प्रति किमी चुकाने होंगे। यूनियन ने ट्रांसपेरेंसी के लिए वेबसाइट शुरू की और किराए के तर्कसंगतीकरण, बाइक टैक्सियों पर रोक और वेलफेयर बोर्ड की मांग की।

महाराष्ट्र में ओला, उबर और रैपिडो जैसी एप-आधारित टैक्सियों के यात्रियों को अब जेब ढीली करनी पड़ेगी। मंगलवार से इन टैक्सियों के ड्राइवरों ने सरकार द्वारा अधिसूचित नए किराए लागू कर दिए हैं। यूनियन का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि कंपनियों ने परिवहन आयुक्त की ओर से जारी निर्देश का पालन नहीं किया।

भारतीय गिग कामगार मंच के अध्यक्ष डॉ. केशव नाना क्षीरसागर ने बताया कि अब हैचबैक कारें जैसे वैगनआर 28 रुपये प्रति किमी, सेडान जैसे स्विफ्ट डिजायर 31 रुपये प्रति किमी और एसयूवी जैसे अर्टिगा 34 रुपये प्रति किमी किराया वसूल रही हैं। पहले छोटे कैब्स का बेस किराया 15-16 रुपये प्रति किमी था, जिससे सफर अब काफी महंगा हो गया है।

  • ट्रांसपेरेंसी के लिए वेबसाइट

क्षीरसागर ने बताया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उन्होंने www.onlymeter.in नाम की वेबसाइट शुरू की है, जहां अधिकृत किराया तालिका सार्वजनिक की गई है। यह कदम तब उठाया गया जब मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने 16 सितंबर को पत्र लिखकर ओला, उबर और रैपिडो से ब्लैक-येलो टैक्सियों के किराए लागू करने को कहा था।

  • काली-पीली टैक्सी का किराया लागू

अथॉरिटी के आदेश के अनुसार काली-पीली टैक्सियों का मौजूदा किराया नॉन-एसी के लिए 20.66 रुपये प्रति किमी और एसी टैक्सी के लिए 22.72 रुपये प्रति किमी है। जब तक एप-आधारित टैक्सियों और ऑटो रिक्शा के लिए अलग किराए तय नहीं हो जाते, तब तक यही दरें लागू रहेंगी। हालांकि, ड्राइवर यूनियन का कहना है कि कंपनियों ने इन दरों का पालन नहीं किया, जिसके चलते उन्होंने खुद यह लागू कर दिया।

  • ड्राइवरों की मांगें

महाराष्ट्र गिग कामगार मंच ने किराए के तर्कसंगतीकरण की मांग की है ताकि एप टैक्सियों का किराया ब्लैक-येलो टैक्सियों के बराबर हो सके। इसके अलावा उन्होंने बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध, ब्लैक-येलो टैक्सियों और ऑटो के परमिट पर सीमा, एप कैब ड्राइवरों के लिए वेलफेयर बोर्ड और ‘महाराष्ट्र गिग वर्कर्स एक्ट’ बनाने की भी मांग की है।

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