
हैदराबाद(ए)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शनिवार को कहा कि राज्य एक ऐसा कानून लाने जा रहा है, जिसके तहत अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की अनदेखी करता है, तो उसके वेतन का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा काटकर उपेक्षित माता-पिता को दिया जाएगा।
नए कानून में होंगे ये नियम
नवचयनित ग्रुप-II कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपने से पहले एक सभा को संबोधित करते हुए रेड्डी ने उनसे आग्रह किया कि वे उन लोगों के प्रति दयालु रहें जो उनके पास समस्याएं लेकर आते हैं। रेड्डी ने कहा, हम एक कानून ला रहे हैं। अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की अनदेखी करता है, तो उसके वेतन का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा काटकर उसके माता-पिता के बैंक खाते में जमा कर दिया जाएगा। आप ही इस कानून का मसौदा तैयार करेंगे। जिस तरह आपको मासिक वेतन मिलता है, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आपके माता-पिता को भी इससे मासिक आय प्राप्त हो।
रेड्डी ने मुख्य सचिव रामकृष्ण राव से इस कानून का मसौदा तैयार करने के लिए अधिकारियों की एक समिति बनाने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नए अधिकारियों को ‘तेलंगाना राइजिंग 2047’ विजन डॉक्यूमेंट के अनुरूप राज्य को आगे बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए। रेड्डी ने राज्य में अपने 10 साल के शासन के दौरान ग्रुप-I और ग्रुप-II की अधिसूचनाएं जारी न करने के लिए पिछली बीआरएस सरकार की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा, पिछले बीआरएस शासकों ने बलिदानों की नींव पर सरकार बनाई, लेकिन बेरोजगारों पर ध्यान नहीं दिया। अगर पिछली सरकार ने तेलंगाना के शहीदों की आकांक्षाओं को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया होता, तो युवाओं को आठ साल पहले ही नौकरी मिल सकती थी।
रेड्डी ने आरोप लगाया कि उन्होंने अदालतों में मामले दायर करके और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके नौकरियों की भर्ती में बाधा डालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपने पहले साल में 60,000 नौकरियां दी हैं। उन्होंने आगे चेतावनी दी कि बीआरएस नेता सत्ता में वापसी के लिए भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।