
श्रीहरिकोटा(ए)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय नौसेना के लिए उसके अब तक के सबसे उन्नत (एडवांस्ड) कम्युनिकेशन सैटेलाइट CMS-03 (GSAT-7R) को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।
यह सैटेलाइट नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार (स्पेस-बेस्ड कम्युनिकेशन) और समुद्री इलाके की निगरानी (मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस) की क्षमता को कई गुना मजबूत कर देगा।
श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण
इस सैटेलाइट को आज शाम 5:26 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC- SHAR) के दूसरे लॉन्च पैड से लॉन्च किया गया। ISRO के वैज्ञानिकों ने इसे महीनों की मेहनत से तैयार किया है।
क्यों खास है यह सैटेलाइट?
1. सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट: इस सैटेलाइट की सबसे खास बात यह है कि यह भारत का अब तक का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट है। इसका वजन लगभग 4400 किलोग्राम है।
2. 100% ‘मेक इन इंडिया’: GSAT-7R को पूरी तरह से भारत में ही डिजाइन और बनाया गया है। इसमें कई स्वदेशी तकनीक वाले पार्ट्स लगे हैं, जो खास तौर पर नौसेना की जरूरतों के लिए बनाए गए हैं। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक बड़ा उदाहरण है, जिससे भारत की विदेशी सैटेलाइट्स पर निर्भरता खत्म होगी।
3. हाई-टेक संचार: यह सैटेलाइट नौसेना के जहाजों, हवाई जहाजों, पनडुब्बियों और समुद्री ऑपरेशंस सेंटर्स के बीच बेहद तेज और सुरक्षित संचार (वॉइस, डेटा और वीडियो लिंक) स्थापित करेगा।
4. हिंद महासागर में ‘तीसरी आंख’: यह सैटेलाइट भारतीय महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में मजबूत टेलीकम्युनिकेशन कवरेज देगा। इसकी हाई-कैपेसिटी बैंडविड्थ के कारण नौसेना को समुद्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने और किसी भी खतरे की तुरंत जानकारी मिलने में मदद मिलेगी।
चीन-पाकिस्तान पर बढ़ेगी निगरानी
आज के समय में जब हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की गतिविधियां बढ़ी हैं, यह सैटेलाइट नौसेना को अंतरिक्ष से नजर रखने और तुरंत कार्रवाई करने की अभूतपूर्व ताकत देगा। नौसेना प्रमुख ने भी कहा है कि यह सैटेलाइट राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है।