
नईदिल्ली(ए)। लावारिस कुत्तों से जुड़े मामले में बड़ी संख्या में दायर हो रही अंतरिम अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में जितनी अर्जियां दाखिल की जा रही हैं, उतनी तो आम तौर पर इन्सानों से जुड़े मामलों में भी नहीं आतीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लावारिस कुत्तों से जुड़ा मामला बुधवार को विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष दो वकीलों ने लावारिस कुत्तों के मामले का उल्लेख किया।
इनमें से एक ने बताया कि उन्होंने अंतरिम अर्जी दाखिल की है। तब जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा, इतनी अर्जियां तो सामान्य तौर पर इंसानों के मामलों में भी नहीं आतीं। अत्यधिक अर्जियों के कारण मामले की सुनवाई और प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
मामले में सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ गठित
एक अन्य वकील ने जब स्थानांतरण याचिका का उल्लेख किया, तो पीठ ने कहा कि बुधवार को कई याचिकाएं एकसाथ सुनी जाएंगी। सभी पक्षों को बात रखने का अवसर दिया जाएगा। इस मामले में सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ गठित की गई है। इसमें जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया शामिल हैं। यह पीठ लावारिस कुत्तों की समस्या, उससे उत्पन्न जनसुरक्षा के जोखिम व प्रशासनिक कदमों की समीक्षा करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद भूखंड आवंटन में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलटा
दूसरी ओर शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 24 मई, 2024 और 15 जुलाई, 2024 के आदेशों को रद्द कर दिया। साथ ही कंपनी को निर्देश दिया कि वह बयाना राशि को चार सप्ताह के भीतर दोबारा जमा करे। जीडीए से कहा कि बयाना राशि जमा करने की तिथि से दो सप्ताह के भीतर वह उक्त कंपनी के पक्ष में संबंधित भूखंड के आवंटन का आदेश जारी करेगा और नीलामी प्रक्रिया को कंपनी के पक्ष में संपन्न करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।