
नईदिल्ली(ए)। देश में मेडिकल पीजी की हजारों खाली सीटों को भरने के लिए केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने चिकित्सा जगत को हैरान कर दिया है। नीट पीजी 2025 के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ में ऐतिहासिक गिरावट की गई है। आलम यह है कि रिजर्व कैटेगरी के लिए अब यह कटऑफ घटाकर ‘जीरो’ पर्सेंटाइल कर दी गई है। इसका सीधा मतलब है कि परीक्षा में माइनस नंबर (-40) लाने वाले उम्मीदवार भी अब एमडी (MD) और एमएस (MS) जैसी डिग्री हासिल करने के लिए योग्य माने जाएंगे।
18 हजार सीटें खाली, इसलिए गिराया गया स्तर
दरअसल, नीट पीजी काउंसलिंग के दो राउंड पूरे होने के बाद भी सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 18,000 से ज्यादा पीजी सीटें खाली पड़ी हैं। इन्हें भरने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है। संशोधित नियमों के मुताबिक, सामान्य वर्ग (General) और ईडब्ल्यूएस (EWS) उम्मीदवारों के लिए कटऑफ 50 पर्सेंटाइल से घटाकर सीधे 7 पर्सेंटाइल कर दी गई है। अंकों के लिहाज से देखें तो पहले जहां 800 में से 276 नंबर लाना जरूरी था, वहीं अब महज 103 नंबर लाने वाले भी योग्य माने जाएंगे। वहीं, दिव्यांग श्रेणी (PwBD) के लिए कटऑफ 45 से घटाकर 5 पर्सेंटाइल कर दिया गया है।
माइनस 40 नंबर लाने वाले भी ले सकेंगे दाखिला
सबसे बड़ा बदलाव आरक्षित वर्ग (SC, ST और OBC) के लिए किया गया है। इन वर्गों के लिए पर्सेंटाइल 40 से घटाकर शून्य (0) कर दिया गया है। इसका तकनीकी मतलब यह है कि अगर किसी छात्र ने नीट पीजी परीक्षा में 800 में से माइनस 40 (-40) अंक भी हासिल किए हैं, तो वह भी काउंसलिंग के तीसरे राउंड में हिस्सा लेने और दाखिला पाने के लिए पात्र होगा। पहले इनके लिए कटऑफ स्कोर 235 था। आसान शब्दों में, जिस भी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ने परीक्षा दी है, वह अब सीट पाने का दावेदार है।
विशेषज्ञों ने उठाए सवाल: ‘एग्जाम में सो जाने वाला भी अब टॉपर के बराबर’
सरकार के इस फैसले का मेडिकल बिरादरी में कड़ा विरोध शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मेडिकल शिक्षा के स्तर में भारी गिरावट आएगी। हेल्थ एक्टिविस्ट डॉ. ध्रुव चौहान ने तंज कसते हुए कहा कि कटऑफ जीरो करने का फायदा काबिल डॉक्टरों को नहीं, बल्कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को होगा, जो अपनी सीटें करोड़ों में बेच सकेंगे। उन्होंने कहा कि अगर आपके पास पैसे हैं, तो भले ही आप एग्जाम में सो गए हों और नेगेटिव नंबर लाए हों, आप उस छात्र के बराबर हैं जिसने दिन-रात मेहनत की है।
प्राइवेट कॉलेजों को फायदा पहुंचाने का आरोप
डॉ. मीत गोनिया ने भी इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे भारतीय चिकित्सा शिक्षा के स्तर के लिए चिंताजनक बताया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि अब सीट की उपलब्धता योग्यता पर नहीं, बल्कि पैसे पर निर्भर करेगी। बता दें कि इससे पहले 2023 में भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने सीटें भरने के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को घटाकर शून्य कर दिया था, जिसे लेकर तब भी काफी विवाद हुआ था।