
नईदिल्ली(ए)। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने शनिवार को कहा कि संवाद और मध्यस्थता के जरिये विवादों को सुलझाने का रास्ता मिल सकता है। इससे तनाव को सहयोग में बदला जा सकता है और आपसी रिश्तों में फिर से सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है।
सीजेआई गवई ने कहा कि यह अधिनियम न्याय को सहभागी, समान और सुलभ बनाता है और साथ ही अदालतों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को भी कम करने में मदद करता है। सम्मेलन के उद्घाटन मौके पर ओडिशा के राज्यपाल हरिबाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हरीश कुमार टंडन और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत समेत कई गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।
रिश्ते बचाने और सामाजिक सद्भाव बनाने का माध्यम है मध्यस्थता: राज्यपाल
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, राज्यपाल कंभमपति ने कहा कि मध्यस्थता केवल विवाद सुलझाने का जरिया ही नहीं है, बल्कि यह विश्वास कायम करने, रिश्ते बचाने और सामाजिक सद्भाव बनाने का माध्यम है। उन्होंने कहा, ‘मध्यस्थता एक शाश्वत अभ्यास है जो संवाद और आम सहमति, मतभेदों को पाटने, संबंधों को सुधारने और निष्पक्ष एवं स्थायी समाधान प्रदान करने पर आधारित है।’
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि ओडिशा न्यायिक सुधार और वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणालियों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन मध्यस्थता को भारत की न्याय वितरण प्रणाली का आधार बनाने के प्रयासों को और मजबूत करेगा, जिससे कानूनी प्रक्रिया में दक्षता, समावेशिता और विश्वास सुनिश्चित होगा। उन्होंने सम्मेलन से प्राप्त सुझावों के शीर्घ क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।
ओडिशा के भुवनेश्वर में इस समारोह से पहले चीफ जस्टिस (CJI) बीआर गवई ने महाराष्ट्र के नासिक में जिला एवं सत्र न्यायालय की नई इमारत का उद्घाटन किया। इस समारोह में उन्होंने देश की सामाजिक और आर्थिक समानता की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संविधान भारतीयों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना गीता, गुरु ग्रंथ साहिब, कुरान और बाइबिल। गवई ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के भाषण का उल्लेख करते हुए कहा, ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ से राजनीतिक समानता मिली है। हालांकि, यह तब तक अधूरी है जब तक सामाजिक और आर्थिक समानता नहीं आती। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता, समानता और बंधुता तीनों का संतुलन ही लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। यदि सामाजिक और आर्थिक असमानता दूर नहीं की गई, तो लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर होगा।
गरीब से गरीब नागरिक तक सुलभ और किफायती न्याय पहुंचे
सीजेआई गवई ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में संविधान की यात्रा सफल रही है और संसद ने श्रमिकों व समाज के कमजोर वर्गों के लिए कई कानून बनाए हैं। न्यायपालिका ने भी एनएम थॉमस केस, इंदिरा साहनी केस और कई हालिया ऐतिहासिक फैसलों से समानता को बढ़ावा दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र की न्यायिक अवसंरचना को अच्छा बताया। चीफ जस्टिस ने कहा, उन्हें पूरी उम्मीद है कि नासिक कोर्ट की 140 साल पुरानी विरासत अब नई इमारत में भी बरकरार रहेगी। इसके माध्यम से गरीब से गरीब नागरिक तक सुलभ और किफायती न्याय पहुंचाना सुनिश्चित हो सकेगा।